एईएस में समय महत्वपूर्ण, जल्द पहुचाएं सरकारी अस्पतालः सिविल सर्जन 

एईएस में समय महत्वपूर्ण, जल्द पहुचाएं सरकारी अस्पतालः सिविल सर्जन 

-एईएस के लिए हर स्तर पर विभाग तैयार
-ग्रामीण क्षेत्रों में आरबीएसके वाहन फैला रहे जागरुकता

प्रमोद कुमार 
 
वैशाली, 8 अप्रैल ।
जिला स्वास्थ्य समिति और सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सिफार) की तरफ से शुक्रवार को सदर अस्पताल स्थित जिला स्वास्थ्य समिति सभागार में मीडिया वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ अखिलेश कुमार मोहन ने विधिवत रुप से किया। मौके पर सीएस ने कहा कि एईएस में एक से 15 साल तक के बच्चों को शुरू में ही चिह्नित कर लें तो बचाव संभव है। एईएस होने पर शुरू का समय गोल्डेन आवर होता है।

इस समय सही इलाज से बच्चे की जान बचायी जा सकती है। एईएस मरीजों  को अस्पताल पहुंचाने के लिए तीन स्तर पर एम्बुलेंस की व्यवस्था की गयी है। जिसमें 102 एम्बुलेंस, मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत आने वाले 20 एम्बुलेंस तथा प्राइवेट टैग वाहन शामिल हैं। वर्कशॉप के दौरान केयर डीटीएल सुमित कुमार ने पावर प्वाइंट के माध्यम से मीडिया कर्मियों को एईएस पर जागरूक भी किया। 


तीन बातें हमेशा रखें याद -
सिविल सर्जन ने कहा कि एईएस के दौरान तीन बातें हमेशा याद रखें। जिसमें बच्चों को रात में सोने से पहले जरूर खाना खिलाओ, सुबह उठते ही बच्चों को भी जगाओ। देखो कहीं बेहोशी या चमक तो नहीं और बेहोशी या चमक दिखते ही तुरंत एम्बुलेंस या नजदीकी गाड़ी से अस्पताल ले जाएं। 
विभागीय स्तर पर तैयारी पूरी -


जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ सत्येन्द्र प्रसाद सिंह ने वर्कशॉप में बताया कि एईएस या जिसे चमकी बुखार भी कहते हैं, पर विभागीय तैयारी पूरी कर ली गयी है। स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण, समाज में जागरूकता से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर और दवाइयों व उपकरण की प्रचूरता है। डॉ सिंह ने बताया कि सदर अस्पताल में एईएस के लिए 15 बेड की व्यवस्था है। इसके अलावा प्रत्येक पीएचसी में  इसके लिए दो बेड सुरक्षित कर लिए गए हैं।

आशा और आंगनबाड़ी कर्मियों को पैरासिटामोल और ओआरएस के पैकेट भी वितरित किए गए हैं, ताकि समय पर बच्चों को उपलब्ध हो पाए। जागरूकता के लिए एक लाख हैंडबिल, 44 सौ पोस्टर तथा 109 फ्लैक्स का भी वितरण प्रखंड को किया गया है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में आरबीएसके के वाहन से चमकी पर माइकिंग कर लोगों को सचेत किया जा रहा है। वहीं जिला एवं प्रखंड स्तर पर कंट्रोल रुम की व्यवस्था भी की गयी है। 


स्वास्थ्यकर्मियों को मिल चुका प्रशिक्षण -
जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ एसपी सिंह ने कहा कि जिला स्तर से प्रखंड स्तर तक एईएस के नियंत्रण के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। चिकित्सकों को एम्स पटना में प्रशिक्षण मिल चुका है।

वहीं एम्बुलेंस में तैनात 109 इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन को भी प्रशिक्षित किया जा चुका है। जिले के भगवानपुर, गोरौल, बैशाली, बेलसर तथा पातेपुर एईएस अतिप्रभावित प्रखंडो में आते हैं। जिले में वर्ष 2020 में 4 तथा 2021 में कुल 11 एईएस मरीज मिले थे। वर्कशॉप में मौके पर सिविल सर्जन डॉ अखिलेश कुमार मोहन, जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ सत्येन्द्र प्रसाद सिंह, केयर डीटीएल सुमित कुमार, डीटीओ सोमनाथ ओझा, सिफार के प्रतिनिधि, भीबीडीओ कार्यालय से राजीव कुमार तथा प्रीति आनंद समेत अन्य लोग मौजूद थे। 

एईएस/चमकी के लिए जिला व प्रखंड कंट्रोल रूम का नंबर -
संस्थान का नाम                      दूरभाष नम्बर

सदर अस्पताल, हाजीपुर          6224260221, 260224
सामुदायक स्वा0 केन्द्र, राजापाकर     8544421940
सामुदायक स्वा0 केन्द्र, भगवानपुर     8544421936
सामुदायक स्वा0 केन्द्र, महनार    8544421929
प्रा0 स्वा0 केन्द, देसरी            8544421938
प्रा0 स्वा0 केन्द, सहदेई बुजूर्ग    8544421933
प्रा0 स्वा0 केन्द, लालगंज            9470003824/8544421927
प्रा0 स्वा0 केन्द, वैशाली          8544421934
प्रा0 स्वा0 केन्द, गोरौल            8544421926
प्रा0 स्वा0 केन्द, पटेढ़ी बेलसर    8544421939
प्रा0 स्वा0 केन्द, बिदूपुर          8544421935
प्रा0 स्वा0 केन्द, जन्दाहा          8544421927
प्रा0 स्वा0 केन्द, पातेपुर        8544421931
प्रा0 स्वा0 केन्द, राघोपुर        8544421932
प्रा0 स्वा0 केन्द, हाजीपुर    8544421925
प्रा0 स्वा0 केन्द, चेहराकला    8544421937
प्रा0 स्वा0 केन्द्र महुआ    8544421930