आपातकाल सेवा में कार्यरत चिकित्सक सुबह 5 से छह बजे के बीच लगाएंगे उपस्थिति

आपातकाल सेवा में कार्यरत चिकित्सक सुबह 5 से छह बजे के बीच लगाएंगे उपस्थिति

- डॉक्टरों की उपस्थिति पर विभाग की पैनी नजर
- 104 कॉल सेंटर से किया जाएगा अनुश्रवण
- रियल टाइम लोकेशन भी चल सकेगा पता

प्रमोद कुमार 

मुजफ्फरपुर,15 अप्रैल ।
जिले में एईएस तथा अतिगंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों की देख-रेख के लिए विभाग डॉक्टरों की उपस्थिति पर पैनी नजर रख रहा है। जिलास्तर से लेकर प्रखंड स्तर तक के अस्पतालों में आपातकालीन सेवा में कार्यरत चिकित्सकों को अब दर्पण प्लस एप के जरिए सुबह 5 से छह बजे के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

जिला वेक्टर बोर्न डिजिज पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार ने कहा कि दर्पण एप पर उपस्थिति की सेवा का आदेश कार्यपालक निदेशक ने पत्र लिख कर जारी किया था। जिसका पालन जिले में शुरू हो चुका है।

यह फैसला एईएस तथा अतिगंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों के उपचार के लिए लाभकारी होगा। जिस एप के जरिए आपातकालीन सेवा के चिकित्सक अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे उसमें उनका रियल टाइम लोकेशन भी दिखेगा।

इस सेवा के शुरू होने से डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। प्रत्येक प्रखंड स्तरीय सामुदायिक तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रोस्टर के अनुसार चिकित्सकों और पारामेडिकल स्टॉफ की ड्यूटी लगी हुई है। जिससे किसी भी वक्त एईएस मरीजों को चिकित्सकीय सहायता मिल सके। 


वाटरमार्क में शामिल हुआ चमकी को धमकी:
डॉ सतीश कुमार ने कहा कि अब विभाग से जारी हो रहे हरेक कागज पर चमकी को धमकी वाटरमार्क की तरह उपयोग में लाया जाएगा। वहीं जिला अस्पताल सहित प्रखंड अस्पतालों में ओपीडी के पर्चे पर चमकी को धमकी की मुहर लगी मिलेगी। इस तरह की कवायद चमकी को ले जागरूकता के लिए की गयी है। 


जिलाधिकारी ने भेजा अनुरोध पत्र :
एईएस पर जागरूकता के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग नित नए प्रयोग भी कर रहा है। जिसके तहत जिलाधिकारी ने चमकी पर जागरूक करते हुए प्रत्येक आशा को एनआईसी के जरिए मैसेज भेजा जा रहा है। वहीं सभी फ्रंटलाहन वर्कर को एक अनुरोध पत्र भी लिखा जा रहा है, जिसमें चमकी से बचाव के साथ जल्द से जल्द चमकी मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की बात भी लिखी है। 


रात्रि चौपाल में रात्रि विश्राम :
एईएस को लेकर पहले वर्षाें में चलाए गए संध्या चौपाल की जगह अब रात्रि चौपाल चलायाा जा रहा है। जिसमें 270 गांवों को गोद लिया गया है। इन गोद लिए गांवों में अधिकारी चमकी पर जागरूकता फैलाते तथा वहीं रात्रि विश्राम भी करते हैं।