बच्चों के शारीरिक और बौद्धिक विकास के लिए खिलायी गई अल्बेंडाजोल की गोली

बच्चों के शारीरिक और बौद्धिक विकास के लिए खिलायी गई अल्बेंडाजोल की गोली

-राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर जिले भर में चला कार्यक्रम

प्रमोद कुमार 

सीतामढ़ी,22 अप्रैल। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर शुक्रवार को जिलेभर में अभियान चलाया गया। अभियान के तहत जिलेभर में 01 से 19 आयु वर्ग के दायरे में आने वाले सभी किशोर-किशोरियों को अल्बेंडाजोल की दवाई खिलाई गई। कार्यक्रम की सफलता को लेकर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. अनंत कुमार झा ने विभिन्न स्कूलों का दौरा कर बच्चों को अल्बेंडाजोल की गोली खिलायी।

इससे पहले राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस समारोह का उदघाटन नगरपालिका मध्य विद्यालय भवदेपुर के प्रांगण में किया गया। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. एके झा और जिला शिक्षा पदाधिकारी अवधेश कुमार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित और फीता काटकरकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मौके पर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बारी-बारी से बच्चों को स्टेज पर बुलाकर खुराक दी। उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता को लेकर रैपिड रिस्पॉन्स टीम का गठन किया गया था।

जो बच जाएंगे 26 को खिलाई जाएंगी:
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. एके झा ने बताया कि शुक्रवार को पूरे जिले में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया गया। जिसके तहत जिले के सभी सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, मदरसा, संस्कृत विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्रों समेत अन्य संस्थानों में कार्यक्रम का आयोजन कर 01 से 19 आयु वर्ग के सभी लाभार्थियों को अल्बेंडाजोल की गोली खिलायी गई। जबकि, 26 अप्रैल को माॅप-अप दिवस के तहत छूटे लाभार्थियों को अल्बेंडाजोल की गोली खिलायी जाएगी।


निर्धारित डोज के अनुसार खिलाई गई दवा:
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा झा ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान निर्धारित डोज के अनुसार दवाई खिलाई गई। जिसमें 1 से 2 वर्ष के बच्चों को अल्बेंडाजोल 400 एमजी टैबलेट को आधा चूरकर पानी के साथ खिलाया गया। 2 से 3 वर्ष के बच्चों को अल्बेंडाजोल 400 एमजी का एक टैबलेट चूर कर पानी के साथ।

इसके साथ ही 3 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों और किशोरों को एक पूरा टैबलेट चबाकर खिलाया गया। इसके बाद ही पानी पिलाना है। इस अति महत्वपूर्ण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए ऑगनबाड़ी सेविका-सहायिका, आशा कार्यकर्ता, जीविका दीदी समेत अन्य सहयोगी संगठन के कर्मियों से सहयोग लिया गया।

मानसिक विकास बाधित करती है कृमि-
डा. झा ने कहा कि बच्चों में कृमि संक्रमण, व्यक्तिगत अस्वच्छता तथा संक्रमित दूषित मिट्टी एवं संपर्क से होता है। कृमि के संक्रमण से बच्चों के पोषण स्तर एवं हीमोग्लोबिन स्तर पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ता है। जिससे बच्चों का शारीरिक और बौद्धिक विकास प्रभावित होता है। कृमि का संचरण चक्र संक्रमित बच्चे के खुले में शौच से आरंभ होता है। खुले में शौच करने से कृमि के अंडे मिट्टी में मिल जाते और विकसित होते हैं।