एईएस जेई से निपटने के लिए एकजुट होकर निभाए जिम्मेदारी डॉ. रवीन्द्र यादव

एईएस जेई से निपटने के लिए एकजुट होकर निभाए जिम्मेदारी डॉ. रवीन्द्र यादव

प्रमोद कुमार 


सीतामढ़ी।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सोनवर्षा में मंगलवार को एईएस/जेई (चमकी बुखार/मस्तिष्क ज्वर) पर प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी, एएनएम आदि शामिल हुईं। जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव ने सभी को एईएस से निपटने की विस्तृत जानकारी दी।

साथ ही इस बीमारी से बचाव के अलावा इसके कारण, लक्षण एवं समुचित इलाज की भी जानकारियां दी। डॉ. यादव ने कहा कि एईएस/जेई से निपटने और जिले को इससे मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों को एकजुट होकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने की जरूरत है।

तभी हम इस बीमारी से सुरक्षित रह सकते और हमारा जिला एईएस/जेई मुक्त बन सकता है।जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव ने कहा कि चमकी से बचाव के लिए तीन धमकियां का पालन करने के लिए लोगों को जागरूक करें। पहला खिलाओ, दूसरा जगाओ और तीसरा अस्पताल ले जाओ।

इसी के तहत बच्चों को रात में बिना खिलाए नहीं सुलाने, सुबह में जगाने और लक्षण महसूस होने पर तुरंत स्थानीय और नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान ले जाने के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करें। उन्होंने लोगों से भी अपील किया कि बच्चों को एईएस से बचाने के लिए माता-पिता को शिशु के स्वास्थ्य के प्रति अलर्ट रहना चाहिए।

जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव ने कहा कि जिले के सभी आशा कार्यकर्ता व आंगनबाड़ी सेविकाओं को स्वास्थ्य विभाग की ओर से एईएस किट दी गयी है।

उन्होंने कहा सभी इसका इस्तेमाल करें। किट में पैरासिटामोटल टैबलेट, ओआरएस का पैकेट व प्रचार सामग्री है, ताकि किसी बच्चे की सेहत खराब होने और उनमें चमकी बुखार के लक्षण दिखे तो बताये गये डोज के हिसाब से आशा कार्यकर्ता दवा दे। तुरंत उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराना भी सुनिश्चित करा सके।जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव ने कहा कि गंभीर बीमारी चमकी से पीड़ित बच्चों को समय पर इलाज किया जाये तो वह पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं।

इसमें तीन बातों को याद रखने की जरूरत है। इसमें पहली यह है कि बच्चों को रात में सोने से पहले खाना जरूर खिलायें। इसके बाद सुबह उठते ही बच्चों को भी जगाएं।

देखें कि बच्चा कहीं बेहोश या उसे चमकी तो नहीं हुई है। बेहोशी या चमकी दिखते ही तुरंत एंबुलेंस या किसी दूसरे वाहन से अस्पताल ले जायें। चमकी बुखार से पीड़त बच्चों को अस्पताल पहुंचाने के लिए गाड़ी का भारा स्वास्थ्य विभाग देती है।